
जब प्रेम ही बलि माँगे
जब अपने ही अजनबी लगने लगें, तो समझो अंधेरा दस्तक दे चुका है। "असली डर तब जन्म लेता है, जब आप सबसे ज़्यादा जिसे प्यार करते हैं, वही आपको सबसे पहले अजनबी....
जब अपने ही अजनबी लगने लगें, तो समझो अंधेरा दस्तक दे चुका है। "असली डर तब जन्म लेता है, जब आप सबसे ज़्यादा जिसे प्यार करते हैं, वही आपको सबसे पहले अजनबी लगने लगे. क्यूंकि शायद वो किसी वशीकरण का शिकार हो चुके है। ये कांटेस्ट - कहानी वशीकरण की - एक ऐसे मामूली नायक/नायिका की दास्ताँ खोज रहा है, जो अब तक बिल्कुल साधारण ज़िन्दगी जी रहे थे। लेकिन कुछ समय से उनके आस पास होती घटनाएं उन्हें परेशान करने लगी है। एक कोने मे घंटो अपने आप से बातें करती हुई माँ, जो कभी-कभी अपने बेटे को ही पहचानने से इंकार कर देती है। वो भाई जो हर वक़्त हसी खेल मे रहता था, अब आँखों मे एक सूनापन लिए घूमता है। रातों में अजीब हरकतें, सुबहों में अधूरी यादें। ऐसे फैसले, जो उनके नहीं लगते। ऐसे अपराध, जिनका कोई कारण नहीं। दुनिया अंधकार मे धीरे-धीरे फिसलती है। इतनी चुपचाप कि रोशनी को भी अपने मिटने का आभास देर से होता है। इंसानों के चेहरे वही रहते हैं, पर उनकी आँखों से कोई और झांखने लगता है। रचिये ऐसी घटनाएं जो दिखाएं, की ये सूनापन सिर्फ एक घर तक सीमित नहीं है। पूरी दुनिया मे लोग एक अनजाने अन्धकार का शिकार हो रहे है। जैसे उनकी आत्मा को किसी ने जकड़ रखा हो, उनकी परछाई में एक और परछाईं साँस ले रही हो। चेहरे पर थकान, दिल में घुटन, मानो कोई अदृश्य हाथ उनकी हर धड़कन को अपनी इच्छा से मोड़ रहा हो। और फिर कहानी मे आता है वो भयावह मोड़, जब नायक की दुनिया टूटने लगती है। एक हादसा जो उसके परिवार या उसके दिल के सबसे करीब…जिससे वह सबसे ज़्यादा प्रेम करता है - उसे मौत की दहलीज़ पर ला खड़ा करता है। तब उसे एहसास होता है की - अगर अभी कुछ नहीं किया, तो वो अपने परिवार या अपनी प्रेयसी को हमेशा के लिए खो देगा। और यहाँ से शुरू होता है, वो परछाइयों का सफर जब नायक सच की तलाश में उतरता है। दिखाओ वो खोज जहाँ नायक को समझ आता है की जो हो रहा है - यह पागलपन या कोई बीमारी नहीं है। यह वशीकरण है। एक ऐसी असुरी सत्ता - जिसके अपने नियम, अपनी भूख, और अपना इतिहास है। यह अचानक हमला नहीं करती - यह पहले सुनती है, फुसफुसाती है, और फिर रास्ता बनाती है - डर, अपराधबोध, पुराने ज़ख्मों के सहारे। धीरे-धीरे इंसान अपनी इच्छा खो देता है। और जब पूरा नियंत्रण हो जाता है - तो वह केवल एक कठपुतली रह जाता है। इस अंधेरे सफ़र में नायक को मिलते हैं कुछ और लोग - जिन्होंने अपनों को खोया है, या जिन्हें बचाने की उम्मीद अब भी ज़िंदा है। जो समझते हैं - यह समस्या व्यक्तिगत नहीं…व्यापक है - पूरी दुनिया में फैलती हुई। दिखाइए वह पल जब नायक और उसके नए दोस्त इस अनजान खोज पर साथ निकलते है। जो उन्हें ले जाती है - एक सुनसान हवेली / खंडहर गाँव / बंद स्कूल - जहाँ दीवारें यादें और अधूरी सच्चाइयाँ छुपाए बैठी हैं। पुरानी डायरियाँ मिलती हैं - रक्त से लिखे अनुष्ठान, टूटे हुए मंत्र और एक सच्चाई - यह सत्ता नई नहीं है, यह पहले भी आई थी। अब लड़ाई सिर्फ़ राक्षस से नहीं है, लड़ाई है समय से। क्योंकि हर बीतता दिन, किसी और को पूरी तरह निगल रहा है। अंतिम टकराव एक अनुष्ठान बन जाता है - जहाँ मंत्र पढ़े जाते हैं, रक्त बहता है, और आत्माएँ दाँव पर लगती हैं। और सबसे बड़ा सवाल सामने आता है - क्या राक्षस को हराने के लिए नायक को उस इंसान की बलि देनी होगी, जिससे वह सबसे ज़्यादा प्यार करता
Disclaimer: This show may contain expletives, strong language, and mature content for adult listeners, including sexually explicit content and themes of violence. This is a work of fiction and any resemblance to real persons, businesses, places or events is coincidental. This show is not intended to offend or defame any individual, entity, caste, community, race, religion or to denigrate any institution or person, living or dead. Listener's discretion is advised.
E1. जब अपने ही अजनबी लगने लगें
E2. आँखों में उतरता सूनापन
E3. अधूरी यादों की सुबह
E4. परछाइयों का फैसला
E5. जहाँ आवाज़ें आकार लेती हैं
E6. अंधकार का असर


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