
Partishod Ki Jawala
आर्यावर्त के साम्राज्य में सूरज का ढलना केवल दिन का अंत नहीं था, बल्कि आर्यन के लिए उसके सुनहरे जीवन का अंतिम सूर्यास्त था। इस दुनिया में, जिसे 'प्राण-लोक' कहा....
आर्यावर्त के साम्राज्य में सूरज का ढलना केवल दिन का अंत नहीं था, बल्कि आर्यन के लिए उसके सुनहरे जीवन का अंतिम सूर्यास्त था। इस दुनिया में, जिसे 'प्राण-लोक' कहा जाता था, मनुष्य की शक्ति उसके शरीर से नहीं, बल्कि उसके 'आत्मा-पशु' (Soul Beast) से तय होती थी। जिसके पास जितना शक्तिशाली शिकारी, उसका उतना ही ऊँचा रुतबा। आर्यन के पास कभी 'स्वर्ण-बाज़' (Golden Falcon) था—एक ऐसा दिव्य जीव जिसकी उड़ान बादलों को चीर देती थी। लेकिन आज? आज आर्यन के हाथ कांप रहे थे। पतन की वो रात महल का मुख्य चौक लोगों से भरा था। सम्राट के सैनिकों ने आर्यन को घुटनों के बल गिरा दिया था। उसके सामने खड़ा था उसका सौतेला भाई, विक्रम, जिसके चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान थी। "आर्यन," विक्रम ने फुसफुसाते हुए कहा, "बिना आत्मा के मनुष्य केवल एक खाली बर्तन है। और खाली बर्तनों को तोड़ देना ही बेहतर होता है।" विक्रम ने अपने 'काले तेंदुए' को इशारा किया। एक चीख गूंजी। आर्यन के भीतर का वो दिव्य बंधन, जो उसे उसके बाज़ से जोड़ता था, बेरहमी से काट दिया गया। यह दर्द शारीरिक नहीं था; ऐसा महसूस हुआ जैसे किसी ने उसकी रूह को बीच से फाड़ दिया हो। उससे उसका नाम छीन लिया गया। अब वह 'राजकुमार आर्यन' नहीं, बल्कि केवल 'अपाहिज' था।
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E1. राख का साम्राज्य और खंडित आत्मा
E2. शून्य का आलिंगन और रक्त का अभिषेक
E3. निषिद्ध वन और रक्त पिपासा
E4. पूर्वजों का रक्त और शून्य की त्रासदी
E5. सप्त मुखी छाया और नियति का तांडव
E6. रजतमय रक्षक और शून्य का पलायन


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